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छोटे शब्द इतना दर्द क्यों देते हैं?

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यह बहुत अजीब बात है, बहुत ही विचित्र विरोधाभास है। एक पत्थर आपको उतना दर्द नहीं देता, लेकिन एक छोटा-सा शब्द आपको भीतर तक हिला देता है। एक कांटा आपको इतनी गहराई से घायल नहीं करता, लेकिन एक लापरवाह वाक्य कयी दिनों तक आपके भीतर दर्द देता रहता है। क्योंकि शब्द आपके शरीर को नहीं छूता। वह किसी और चीज़ को छूता है , शब्द जिसका शायद आंखों से देखना मुश्किल है फिर भी दर्द दे बैठता हैं आपकी पहचान को, आपकी "मैं कौन हूँ" वाली धारणा को। क्योंकि शरीर मजबूत होता है, वह ठीक हो सकता है। लेकिन आपकी पहचान बहुत नाज़ुक होती है, अहंकार बड़ा होता क्योंकि ये सब वास्तविक नहीं है। ये सिर्फ एक विचार है जिसे आप अपने बारे में ढोते रहते हैं। और जिस दिन किसी के शब्द उस विचार को चुनौती या कुछ बोल देते हैं, तो शायद आप डर या सहम जाते हैं।  अब इस फर्क को साफ-साफ समझिए। अगर कोई आप पर पत्थर फेंकता है, तो आप उसका घाव दिखा सकते हैं। वह दिखाई देता है, वह सीधा-सा मामला है। लेकिन जब कोई कहता है कि "तुम बेकार हो" या "तुम काफी नहीं हो" — या यहाँ तक कि एक छोटा-सा मज़ाक भी — तो आप वह घाव किसी को दिखा नह...

महाभारत की कहानी — एक संक्षिप्त परिचय

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महाभारत भारतीय संस्कृति के सबसे महान ग्रंथों में से एक है। इसकी रचना का श्रेय महर्षि पराशर के पुत्र वेदव्यास को जाता है। कहा जाता है कि व्यास जी ने सबसे पहले यह कथा अपने पुत्र शुकदेव को कंठस्थ करवाई, और बाद में अपने अन्य शिष्यों को भी सिखाई। इसी तरह धीरे-धीरे यह कथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी फैलती गई और आज तक जीवित है। एक प्रचलित कथा के अनुसार, राजा परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने एक भव्य यज्ञ आयोजित किया था। इस यज्ञ में सूतजी नाम के एक विद्वान पुराणज्ञ उपस्थित थे, जिन्होंने वहां मौजूद ऋषियों की सभा में महाभारत की पूरी कथा सुनाई। इस सभा के मुखिया महर्षि शौनक थे। महाभारत क्यों खास है- महाभारत सिर्फ एक युद्ध की कहानी नहीं है — यह मानव स्वभाव, रिश्तों, सत्ता के लालच, धर्म और अधर्म के बीच के द्वंद्व को दर्शाने वाला महाकाव्य है। इसे विश्व के सबसे लंबे महाकाव्यों में गिना जाता है, जिसमें एक लाख से भी ज्यादा श्लोक हैं। इसीलिए कहा जाता है — "जो महाभारत में नहीं, वह कहीं नहीं।" हस्तिनापुर का राजवंश- कथा की शुरुआत होती है महाराज शांतनु से। उनके बाद उनके पुत्र चित्रांगद हस्तिनापुर के राजा...

How To Kill Men And Get Away With It. इस book ki इतनी चर्चा क्यों होने लगी।

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किताब की कहानी: "हाउ टू किल मेन एंड गेट अवे विद इट" ये एक eye catching टाइटल है। आज समाज में अपराधी स्त्री हो या पुरुष। अपराध करने वाला हमेशा से दोषी होता हैं। इस बुक को देखकर लगता हैं कि पुरुष को मारने के तरीके बताए होंगे जबकि इस बुक में ऐसा कुछ भी नहीं है। इस बुक की राइटर है  केटी ब्रेंट क्या आप कभी किसी सीरियल किलर से हमदर्दी महसूस कर सकते हैं? सुनने में अजीब लगता है, है ना? लेकिन यही इस किताब की सबसे बड़ी खासियत है। यह एक डार्क कॉमेडी थ्रिलर है, जो हंसाती भी है और सोचने पर मजबूर भी करती है। यह किताब हत्या को बढ़ावा नहीं देती — बल्कि समाज में महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा, ताकतवर लोगों की मनमानी, और कानून की कमजोरियों पर करारा तंज कसती है कहानी की हीरोइन है किटी कोलिंस — एक चमकती-दमकती सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर। बाहर से देखने पर उसकी जिंदगी बिल्कुल परफेक्ट लगती है — पैसा, शोहरत, आजादी। लेकिन इस चमक के पीछे एक ऐसा राज छिपा है, जो किसी को भी हैरान कर दे। एक रात, क्लब से घर लौटते समय किटी का सामना एक ऐसे आदमी से होता है जो उसका पीछा करता है और उसे नुकसान पहुंचाने क...

वेदमूर्ति की उपलब्धि का कोई जवाब नहीं

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कभी-कभी किसी देश की महानता एक टेक्नोलॉजी, किसी खोज, किसी युद्ध या देश की ताकत, सेना, अर्थव्यवस्था या वैज्ञानिक आविष्कारों में नहीं होती। बल्कि वह एक साधारण से व्यक्ति*l में छिपी होती है, जो बाहर से सामान्य होता है, पर अपने भीतर  अद्भुत क्षमता लेकर चलता है। भारत में पिछले दो दिनों से एक ऐसा ही नाम चर्चा में है— वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे गनपाठी  उम्र सिर्फ 19 साल यह लड़का न कोई फिल्म स्टार है, न क्रिकेटर, न रियलिटी शो का विजेता, न सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर। फिर भी देश के प्रधानमंत्री से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक, काशी के गलियारों से लेकर साधु-संतों और बुद्धिजीवियों तक हर जगह इसका नाम हो रहा है। ये चर्चा इसलिए नहीं कि वह अमीर परिवार से आता है, बल्कि इसलिए कि उसने वह काम किया है जो आज तक कोई मशीन, कोई कंप्यूटर चिप, कोई सुपर कंप्यूटर या एआई मॉडल नहीं कर सका।  इस लड़के ने किया क्या है ? वेदमूर्ति ने 200 वर्षों में वह उपलब्धि हासिल की है जो आज तक कोई पूरा नहीं कर पाया। वाराणसी के वल्लभ्राम शालिग्राम सांगेवेद विद्यालय में 2 अक्टूबर से 30 नवंबर तक लगातार 50 दि...

भविष्य की चिंता आपके वर्तमान को खा रही हैं

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एक बार एक छोटे से गाँव में आदित्य  नाम का युवक रहता था। आदित्य पढ़ाई-लिखाई में अच्छा था, लेकिन उसका मन हमेशा बेचैन रहता। वह हर समय सोचता रहता— “कल क्या होगा? अगर परीक्षा खराब हो गई तो? नौकरी नहीं मिली तो? शादी ठीक न हुई तो? बीमारी आ गई तो?” उसके दिमाग में हजारों चिंताएँ घूमती रहतीं। वह रात-रात भर सो नहीं पाता था। कभी भविष्य की चिंता, कभी अतीत की गलती—बस इन्हीं में उसका जीवन उलझा हुआ था। एक दिन उसकी यह बेचैनी देखकर गाँव के एक बुज़ुर्ग साधु ने उसे बुलाया। साधु ने पूछा, “बेटा, तेरी आँखों में इतनी थकान क्यों है?” आदित्य ने कहा, “बाबा, मुझे हर समय भविष्य की चिंता सताती है। मैं सोचता हूँ कि कल क्या होगा। अगर सब बिगड़ गया तो?” साधु मुस्कुराए और बोले, “तू मुझे एक बात बता—जब तू खेत में बीज बोता है, क्या तू उसी दिन फल खा लेता है?” आदित्य ने कहा, “नहीं बाबा, फल तो अपने समय पर आता है।” साधु ने फिर पूछा, “तो फिर तू क्यों चाहता है कि जीवन का हर फल पहले से ही तुझे पता चल जाए? भविष्य बीज की तरह है—आज बो, समय आने पर फल अपने आप मिलेगा। लेकिन अगर तू अभी चिंता में बीज को उखाड़ देगा, तो फल ...